Hubble Telescope ने ब्रह्मांड में ऐसी चीज खोज निकाली, वैज्ञानिक भी देखते रह गए

सेंट्रल डेस्क/ ज्ञान विज्ञान विभाग, 7 जनवरी 2026: NASA के हबल टेलीस्कोप ने ब्रह्मांड के इतने सारे रहस्य खोज के निकाल दिए हैं, कि पृथ्वी पर ब्रह्मांड के बारे में किसी काल्पनिक कहानी की जरूरत ही नहीं रह गई। अब ब्रह्मांड में घूम रही एक नई वस्तु खोज निकाली है। वैज्ञानिकों ने अपने रिकॉर्ड के लिए इसको Cloud 9 नाम दिया है। यह अपने आप में रहस्यमई चीज है। चलिए इस आर्टिकल में पढ़ते हैं कि NASA का लाडला हबल टेलीस्कोप इस बार क्या ढूंढ लाया है:- 

क्लाउड 9 क्या है ? 

यह एक failed galaxy है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में RELHIC (Reionization-Limited Hydrogen I Cloud) कहा जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 14 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर, मेसियर 94 (M94) नामक आकाशगंगा के पास स्थित है। फेल गैलेक्सी का मतलब होता है एक ऐसी गैलेक्सी जिसमें तारे नहीं बने। यदि कोई तारा नहीं बना तो फिर उसका मंडल भी नहीं बना। जैसे अपनी गैलेक्सी में “सूर्य” एक तारा है और पृथ्वी-चंद्रमा सहित मंगल, बुद्ध, बृहस्पति, शुक्र, शनि इसका मॉडल हैं।

तारे क्यों नहीं बने? 

आमतौर पर डार्क मैटर के इन बादलों में हाइड्रोजन गैस इकट्ठा होकर तारों को जन्म देती है, लेकिन क्लाउड 9 में पर्याप्त गैस जमा नहीं हो पाई, जिसके कारण तारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। हबल टेलीस्कोप के उन्नत कैमरों ने पुष्टि की है कि वहां वास्तव में कोई तारा मौजूद नहीं है। 

डार्क मैटर क्या होता है? 

डार्क मैटर पूरे ब्रह्मांड की लगभग 85% सामग्री बनाता है, लेकिन इसे देखना असंभव है क्योंकि यह प्रकाश नहीं छोड़ता। क्लाउड 9 वैज्ञानिकों को डार्क मैटर के प्रभुत्व वाले बादलों को समझने का एक दुर्लभ अवसर देता है, क्योंकि इसमें डार्क मैटर का द्रव्यमान सूर्य से लगभग 5 बिलियन गुना है, जबकि सामान्य हाइड्रोजन गैस का द्रव्यमान केवल 1 मिलियन गुना है। 

primordial building block

टीम लीडर एलेजांद्रो बेनिटेज़-लैलंबे के अनुसार, विज्ञान में हम सफलताओं से ज्यादा विफलताओं से सीखते हैं। क्लाउड 9 में तारों का न होना यह साबित करता है कि यह एक “आदिम निर्माण खंड” (primordial building block) है, जो शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के बनने की प्रक्रिया को समझने में मदद करेगा। 

भविष्य की संभावना: 

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह एक पूर्ण विकसित आकाशगंगा बन सकती है, लेकिन इसके लिए इसे लगभग 5 बिलियन सौर द्रव्यमान के बराबर हाइड्रोजन गैस इकट्ठा करनी होगी।

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