BJP gears up for a “election move” in West Bengal, frontline responsibility handed to leaders from Bihar.

West Bengal Assembly Election: भारतीय जनता पार्टी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति तेज कर रही है। बिहार के अनुभवी नेताओं को वहां संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। सीतामढ़ी के पूर्व विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार को संगठन विस्तार का जिम्मा मिला है। उनका लक्ष्य कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करना है, ताकि भाजपा राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सके।

संवाद सहयोगी, सीतामढ़ी। BJP West Bengal Strategy: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में ‘गरदा’ प्रदर्शन करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ‘चौंकाने’ की तैयारी में जुट गई है।

सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी

संगठन को नई धार देने और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी जमीन मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। इस रणनीति के तहत बिहार के अनुभवी नेताओं को पश्चिम बंगाल में अहम संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

संगठन विस्तार का काम

इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं सीतामढ़ी के पूर्व विधायक डॉ. मिथिलेश कुमार को पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी दी गई है। वे वहां प्रवास कर विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे और बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त बनाने पर काम करेंगे।

काम में जुटे नेता

डॉ. मिथिलेश कुमार ने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के संगठन महामंत्री अमिताभ चक्रवर्ती से मुलाकात कर संगठनात्मक स्थिति, राजनीतिक समीकरण और सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर विस्तृत चर्चा की। संगठन महामंत्री ने उन्हें राज्य की जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए संगठन को मजबूत करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

चुनावी मोड में लाना प्राथमिकता

पूर्व विधायक ने कहा कि केंद्र और राज्य नेतृत्व के निर्देशों के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और संगठन को चुनावी मोड में लाना प्राथमिकता है। भाजपा का फोकस पश्चिम बंगाल में अपने जनाधार का विस्तार करने और विकल्प के रूप में खुद को मजबूती से स्थापित करने पर है।

भाजपा की विशेष रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार समेत अन्य राज्यों के नेताओं को पश्चिम बंगाल में सक्रिय करना भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिससे संगठनात्मक अनुभव और चुनावी प्रबंधन का लाभ पार्टी को मिल सके।

मार्च-अप्रैल में चुनाव संभव

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में मार्च-अप्रैल 2026 के बीच विधानसभा चुनाव संभावित हैं। 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के पास भारी बहुमत है, जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है।

संतुलन साधने की कोशिश

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर भी तैयारियां तेज हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार पश्चिम बंगाल की गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर नितिन नबीन समेत कई वरिष्ठ नेताओं को चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश संगठन में भी नए चेहरों को शामिल कर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।

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