New labour codes cost TCS, Infosys & HCLTech:-न्यू लेबर कोड ने बिगाड़ दी दिग्गज IT कंपनियों की चाल, 4,000 करोड़ का हुआ नुकसान

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नए लेबर कोड लागू होने से TCS, इंफोसिस और HCLTech को कुल 4,373 करोड़ रुपये से ज्यादा का एकमुश्त खर्च उठाना पड़ा है, जिससे दिसंबर तिमाही में उनके मुनाफे पर दबाव पड़ा. हालांकि, कंपनियों का कहना है कि आगे चलकर इस बदलाव का मार्जिन पर असर सीमित रहेगा और यह 1020 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा नहीं होगा.

देश की बड़ी आईटी कंपनियां को बीती तिमाही में तगड़ा घाटा लगा है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस और HCLTech को नए लेबर कोड लागू करने से जुड़े एक्स्ट्रा खर्चों के कारण 4,373 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. इसकी वजह से 31 दिसंबर को खत्म हुई तीसरी तिमाही में देश की तीन सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनियों के मुनाफे में भारी दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई है.

14 जनवरी को इंफोसिस ने अपनी दिसंबर तिमाही की कमाई रिपोर्ट में बताया कि नए लेबर कोड के कानूनी असर की वजह से उसे 1,289 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च उठाना पड़ा. इस खर्च में पिछली सर्विस से जुड़ी ग्रेच्युटी की देनदारी बढ़ना और छुट्टियों की देनदारी बढ़ना शामिल है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने 12 जनवरी को बताया कि उसे नए लेबर कोड के कारण 2,128 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ा, जबकि HCLTech ने 956 करोड़ रुपये के असाधारण खर्च की जानकारी दी.

इसका मार्जिन पर क्या असर पड़ा?

जहां TCS ने नए लेबर कोड से जुड़ी लागत की चुनौतियों के बावजूद तीसरी तिमाही में अपना ऑपरेटिंग मार्जिन 25.2 प्रतिशत पर बनाए रखा और HCLTech ने अपना ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़ाकर 18.6 प्रतिशत कर लिया. वहीं, इंफोसिस को नुकसान उठाना पड़ा. इंफोसिस ने तीसरी तिमाही में 18.4 प्रतिशत का ऑपरेटिंग मार्जिन दर्ज किया, जो पिछली तिमाही के 21 प्रतिशत से काफी कम है. हालांकि, कंपनी ने साफ किया कि अगर लेबर कोड से जुड़े खर्च नहीं होते, तो उसका एडजस्टेड मार्जिन करीब 21.2 प्रतिशत रहता. तीनों कंपनियों ने कहा है कि आने वाली तिमाहियों में नए लेबर कोड का मार्जिन पर बहुत सीमित असर पड़ेगा. कंपनी मैनेजमेंट का अनुमान है कि इसका असर करीब 10 से 20 बेसिस प्वाइंट्स (bps) तक ही रहेगा.

कंपनी के अधिकारियों ने क्या कहा?

नवंबर 2025 में लागू हुए नए लेबर कोड ने कई अहम बदलाव किए हैं, जिनका मकसद कर्मचारियों को बेहतर वेतन, ज्यादा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं देना है. IT और ITES सेक्टर के लिए, चारों नए लेबर कोड ने फिक्स्ड-टर्म नौकरी, अनिवार्य नियुक्ति पत्र, ज्यादा बेसिक सैलरी और निश्चित काम के घंटे जैसे नियम तय किए हैं ताकि कर्मचारियों को तय सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकें. इसके अलावा, इन कोड्स के तहत IT कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएं रात की शिफ्ट में काम कर सकें, जिससे उन्हें ज्यादा कमाई का मौका मिले. TCS के मुताबिक, नए लेबर कोड के तहत किए गए 2,128 करोड़ रुपये के खर्च में से करीब 1,800 करोड़ रुपये ग्रेच्युटी के लिए और बाकी करीब 300 करोड़ रुपये छुट्टी से जुड़ी देनदारियों को समायोजित करने में खर्च हुए.

TCS के CFO समीर सेक्सरिया ने कंपनी की कमाई के बाद एनालिस्ट कॉल में कहा कि यह पूरी तरह से कर्मचारियों से जुड़ी लागत है और यह आगे भी बनी रहेगी. हमें उम्मीद है कि इसका असर बहुत ज्यादा नहीं होगा, करीब 10-15 बेसिस प्वाइंट्स के बीच रहेगा. जब तक नियम और ज्यादा साफ नहीं होते, हमें किसी अतिरिक्त बड़े खर्च की उम्मीद नहीं है. इंफोसिस के CFO जयेश संघराजका ने भी कहा कि इस खर्च का सालाना आधार पर करीब 15 बेसिस प्वाइंट्स का लगातार असर रहेगा. उन्होंने कहा कि आगे चलकर यह लेबर कोड का नियमित असर होगा.

HCLTech ने क्या कहा?

HCLTech ने बताया कि नए लेबर कोड का पालन करने के लिए जरूरी बदलावों के कारण उसे एक बार में करीब 109 मिलियन डॉलर का असर झेलना पड़ा. HCLTech के CEO सी विजयकुमार ने नोएडा में कंपनी की अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि लेबर कोड के चलते हमें आगे चलकर बहुत ज्यादा अतिरिक्त खर्च नहीं दिखता. इसका असर 10 से 20 बेसिस प्वाइंट्स के बीच ही रहेगा.

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